BANJO MOVIE REVIEW: Banjo is a exciting story of street musicians who became famous music band

 

बॉलीवुड स्टार रितेश देशमुख और हॉट एक्ट्रेस नर्गिस फाखरी की फिल्म ‘बैंजो’ एक म्यूजिकल एक्शन ड्रामा फिल्म है।बैंजो फिल्म स्ट्रीट म्यूजिशियन को डेडीकेट की गई है। एक स्ट्रीट बैंजो पार्टी का मशहूर म्यूजिक बैंड बनने का सफ़र रोमांचक तरीके से दिखाने का प्रयास बैंजो फिल्म में  किया गया है। आइए जानते हैं क्या है बैंजो की कहानी और यह दर्शकों का मनोरंजन करने में कितना कामयाब हुई है।

कहानी-

बैंजो की कहानी  मुंबई के एक स्ट्रीट बैंजो पार्टी की है जो कड़े संघर्ष के बाद एक इंटरनेशनल म्यूजिक बैंड बन जाता है। मुंबई के झुग्गी झोपड़ियों में रहनेवाले तराट (रितेश देशमुख) और उसके दोस्त ग्रीस (धर्मेश येलांडे), पेपर, वाज्या के इर्द गिर्द बैंजो की कहानी घुमती है। तराट बस्ती के नेता पाटिल के लिए वसूली का काम करता है। ग्रीस छोटासा गैरेज चलाता है। पेपर हर दिन सुबह पेपर बांटने का काम करता है और वाज्या शदियों में बैंड बजाकर अपना गुज़र बसर करता है। इसी बीच कुछ एक्स्ट्रा पैसे कमाने के लिए गणेशोत्सव और नवरात्री जैसे त्योहारों में बैंजो भी बजाते हैं।[इसे भी पढ़ें: करण जौहर ने अजय देवगन को फिर ललकारा, यह करण का आत्मविश्वास है या घमंड]

दूसरी ओर न्यूयॉर्क की रहनेवाली क्रिस (नर्गिस फाखरी) एक इंटरनेशनल म्यूजिक कम्पीटीशन के लिए म्यूजिक अल्बम बनाने की जद्दोजहेद में लगी होती है। इसी दौरान क्रिस की दोस्त उसे तराट का बैंजो गाना ‘बाप्पा’ सुनाती है। तराट का यह गाना क्रिस को बेहद पसंद आता है। क्रिस फ़ैसला करती है की वो अपना अल्बम बनाएगी तो मुंबई के इस स्ट्रीट बैंजो पार्टी के साथ। अपनी दोस्त के सहारे मुंबई पहुचती है और तराट को ढूंढने में जुट जाती है। एक वक्त ऐसा आता है की वो तराट के साथ होती है पर वो नहीं जानती है की यही वो तराट है जिसकी उसे तलाश है।

आख़िरकार क्रिस को पता चल जाता है की उसे जिसकी तलाश है वो तराट ही है। इंटरवल तक कहानी मनोरंजन करती है। फिल्म में एक्शन और कॉमेडी का तड़का भी लगाया गया है। इंटरवल के बाद एक स्ट्रीट बैंजो पार्टी का मशहूर म्यूजिक बैंड बनने का सफ़र शुरू होता है। लेकिन यहां से कहानी प्रेडिक्टेबल हो जाती है।इंटरवल के बाद फिल्म थोड़ा सुस्त हो जाती है लेकिन रितेश और सभी पात्रों की अदाकारी दर्शकों को अंत तक जोड़े रखने में कामयाब होती है। स्ट्रीट बैंजो पार्टी कैसे मशहूर बैंड बनती है और इसके लिए उसे क्या क्या संघर्ष करना पड़ता है यह जानने के लिए आपको ‘बैंजो’ देखनी पड़ेगी।[इसे भी पढ़ें:एमएस धोनी पर बनी बायोपिक से खुश नहीं हैं गौतम गंभीर]

निर्देशन-

मराठी फिल्म इंडस्ट्री के जाने माने निर्देशक रवि जाधव ने बैंजो को निर्देशित किया है। बैंजो की कहानी ना तो मसालेदार है और ना ही हाई प्रोफाइल है। इसे मनोरंजक बनाना एक बेहद मुश्किल टास्क था। लेकिन रवि जाधव ने बैंजो को अपने निर्देशन के ज़रिए दिलचस्प बनाने में कामयाब हुए हैं।

अदाकारी-

बैंजो के मुख्य अदाकार रितेश देशमुख, नर्गिस फाखरी और धर्मेश येलांडे हैं। रितेश ने बेहतरीन अदाकारी की है। धर्मेश ने एक बार फिर साबित किया है की एक डांसर के साथ वो एक बेहतर अदाकार भी हैं। नर्गिस भी एनआरआय लड़की का किरदार अच्छे से निभाया है। इनके अलावा बैंजो को बाकी के कलाकारों ने भी अच्छी अदाकारी की है।

म्यूजिक-

बैंजो का म्यूजिक विशाल शेखर ने दिया है। बाप्पा, उड़न छू और राड़ा जैसे गीत दर्शकों को लुभाने में कामयाब होते हैं। बैक ग्राउंड स्कोर भी ठीक ठाक है।

फिल्म की अच्छी बातें-

1- बैंजो की कहानी झुग्गी-झोपड़ी में रहनेवाले लड़कों की कहानी है। फिल्म को इस तरह से शूट किया गया है कि, आम लोगों को यह कहानी अपने आस पास की लगेगी।

2- बैंजो का संगीत, गाने और डायलॉग प्रभावित करते हैं।

3- फिल्म के हर किरदार की अदाकारी बेहतरीन है।

फिल्म की बुरी बातें-

1- स्ट्रीट बैंजो पार्टी से मशहूर म्यूजिकल बैंड बनने का सफ़र और आकर्षक तरीके से दिखाया जा सकता था।

2- फिल्म के दुसरे हिस्से में कहानी स्लो हो जाती है।

3- एक हद के बाद कहानी प्रेडिक्टेबल भी हो जाती है।

देखें या ना देखें-

यह फिल्म सभी वर्गों को लोगों के लिए बनी है। ख़ास करके युवाओं को और म्यूजिक के चाहनेवालों के लिए ‘बैंजो’ अच्छी फिल्म साबित हो सकती है। अगर आपके पास वक्त हो तो ‘बैंजो’ ज़रूर देख सकते हैं।