Haramkhor Movie Review : Nawazuddin Siddiqui proves that he’s a terrific actor

लंबे समय से केंद्रीय फिल्‍म प्रमाणन बोर्ड के एतराज के कारण अटकी हुई फिल्‍म ‘हरामखोर’ 13 जनवरी को रिलीज होने जा रही है। रिलीजिंग के पहले ही हमें यानी मीडिया को फिल्म दिखाई गई है ताकी इस फिल्म के तथ्यों को हम आपके सामने रख सके। हम आपकी मदत कर सके ये सोचने में कि आप फिल्म ‘हरामखोर’ देखे या ना देखे। आइये जानते है, क्या है ‘हरामखोर’ की कहानी।

कहानी 

इस फिल्म की पुरी कहानी स्कूल टीचर नवाजुद्दीन सिद्दीकी (श्याम) और उसकी किशोरी विद्यार्थी श्वेता त्रिपाठी (संध्या) के इर्द गिर्द ही घूम रही है। नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी मध्यप्रदेश के एक छोटे से गाव के छोटे से स्कूल का टीचर है, जो शादीशुदा है होते हुए अपनी किशोरी विद्यार्थी श्वेता के खूबसूरती का दीवाना है। जिस तरह बाली उम्र में किशोरी अपने टीचर के प्यार में बहक जाती है वही श्वेता के साथ भी होता है। नवाज़ और श्वेता में प्यार हो जाता है और ये प्यार जिस्मानी रिश्ते में तब्दील हो जाता है। नवाज़ और श्वेता के रिश्ते से काफी तकलीफों का सामना दोनों को करना पड़ता है। नवाज़ की बीवी उसे छोड़ जाती है और श्वेता भी शारीरिक रूप से कमज़ोर हो जाती है। कुछ हद तक कॉमेडी भी है और कही-कही स्थिरता भी। फिल्म का आखिरी सीन बेहद दर्दनाक है, जिसे शायद आप अपना नहीं पाएंगे। अब पुरी कहानी जानने के लिए आपको थियेटर तक जाना होगा।

निर्देशन 

इस फिल्म का निर्देशन श्‍लोक शर्मा ने किया है, जिन्होंने अपना पूरा योगदान सही तरीके से फिल्म में दिया है। फिल्म का सन्देश सही तरीके से हम तक पहुचाने में श्लोक शर्मा काफी हद कामयाब हुए है, पर फिल्म की एंडिंग हजम कर पाना थोड़ा सा मुश्किल ज़रूर है। श्लोक के निर्देशन में बनी फिल्म ‘हरामखोर’ दर्शको के मन में काफी सवाल छोड़ जाएगी ये तय है।

अभिनय 

‘हरामखोर’ फिल्म एक छोटे बजट की फिल्म है पर इस फिल्म में काम करने वाले कलाकार अभिनय के मामले में बेहद अमीर निकले। नवाजुद्दीन सिद्दीकी हमेशा की तरह शुरू से अंत तक छाए रहे है, उनकी बात ही निराली है। इस फिल्म से डेब्यू कर रही है किशोरी अभिनेत्री श्वेता त्रिपाठी ने अपने अभिनय से थियेटर का माहौल बांधे रखा है। श्वेता फिल्म में जितनी खुबसूरत और मासूम लग रही है, उतनी ही खूबसूरती से अपने अभिनय को भी पर्दे पर परोसा है। इसके अलावा इस फिल्म में तीन बाल कलाकार भी है, जिन्होंने माहौल को हसनुमा बनाए रखा है। अगर आप सही मायने में एक्टिंग देखना पसंद करते है तो ये फिल्म आपके लिए ही बनी हुई है।

म्यूजिक 

इस फिल्म में म्यूजिक दिया है जसलीन रॉयल ने। हालाकि फिल्म में सिर्फ एक ही गीत है वो भी फिल्म के समाप्ति के बाद इस्तमाल में लाया जाता है। म्यूजिक जितने भी है ठीक ठाक ही है लेकिन फिल्म की कमज़ोर कड़ी भी म्यूजिक ही है। गौरतलब है कि, आजकल फिल्मो की तरफ दर्शको को रिझाने में म्यूजिक का एक बहुत बड़ा योगदान होता है।

सीधी बात नो बकवास 

इस फिल्म का अंत इतना दर्दनाक ना सोचकर सीधे और सरल तरीके से भी पेश किया जा सकता था। शायद फिल्म का अंतिम दृश्य दर्शक स्वीकार नहीं कर सके, क्योकि वो दर्दनाक सीन नवाज़ुद्दीन पर और एक मासूम से बच्चे पर आजमाया गया है। मिलाजुलाकर कम बजट की फिल्म से हम जितना उम्मीद करते है, उससे ज्यादा ही हमें मिलना है। आप एक्टिंग के फैन है और नवाजुद्दीन सिद्दीकी के फैन है तो आपको ये फिल्म देखनी ही चाहिए। हम हमारी तरफ से इस फिल्म को ढाई स्टार देते है, दो स्टार फिल्म के लिए और आधा स्टार नवाज़ की बेहतरीन एक्टिंग के लिए।