सिनेमा की कोई भाषा नहीं होती है: प्रसन्नजीत

मैं इतने लंबे समय से बांग्ला सिनेमा में काम कर रहा हूं। मैंने मुंबई में भी काम किया है। 340 फिल्मों करने के बाद, मैंने महसूस किया कि सिनेमा की कोई भाषा नहीं होती है। इससे कोई फर्क नही पड़ता कि आप कहां से आते हैं