पिछले कुछ सालों से विदेशों में 'एलीट' बनकर डोल रहा इंडियन सिनेमा 'कॉमन मैन' बनकर वापस लौट रहा है। इस बीच भारतीय सिनेमा 'रा.वन' से होते हुए 'कृष' तक बना, लेकिन आखिरकार 'पैडमैन' के रूप में कॉमन मैन बनकर ही सिनेमा को बॉक्स आॅफिस पर अपने मूल दर्शकों के बीच वापस लौटना पड़ा। ये सुखद है। कहानी और किरदार अब स्टारडम के बोझ तले नहीं दब रहे और दर्शक केवल स्टारकास्ट के बजाय मजबूत स्क्रिप्ट और निर्देशन को भी देख रहा है।
90 के बाद के दशकों में यशराज फिल्म्स और धर्मा प्रोडक्शन जैसे बड़े प्रोडक्शन हाउस ने एनआरआई आॅडियंस को ध्यान में रखकर सिनेमा बनाना शुरू किया। शुरुआत में आम भारतीय दर्शकों को 70 एमएम के परदे पर ये चमक लुभाती भी रही, लेकिन लगातार एक ही जैसी फिल्मों में 'आम आदमी' खुद को तेजी से गायब होता हुआ महसूस करने लगा। इसका असर बड़ी स्टारकास्ट से सजी फिल्मों के फ्लॉप होने पर भी पड़ा और आखिरकार 'न्यू इंडिया' के बीच 'ओल्ड सिनेमा' की ही वापसी में फिल्म इंडस्ट्री को अपना भला नजर आने लगा। [यह भी पढ़ें: सुई-धागा का First Look रिलीज, अनुष्का और वरुण का देसी अवतार सोशल मीडिया वायरल]
फिल्मों में आम आदमी की कहानी को दमदार ढंग से कहने की शुरुआत रामगोपाल वर्मा ने की और इसके पीछे जो नाम सबसे पहले आता है वह है अनुराग कश्यप का। अनुराग ने रामू के लिए 'शूल' जैसी फिल्म लिखी तो सौरभ शुक्ला ने सिनेमा को 'सत्या' के जरिए बॉक्स आॅफिस को भीखू महात्रे के रूप में नया डॉन दिया। इसी दौर में प्रकाश झा, डेविड धवन, राजकुमार संतोषी जैसे फिल्मकार भी अपने स्टाइल का सिनेमा बनाते रहे, लेकिन 'कॉमन मैन' की जो असल कहानियां आनी शुरू हुई उसकी शुरुआत एक लंबे गैप के बाद 2009 के आस-पास होनी शुरू हुई। ए लिस्टर स्टार्स के साथ ही स्टार किड्स भी इसी रेस में अब शामिल हैं।
2010 के बाद परदे पर लौटा 'कॉमन मैन'
'कॉमन मैन' की असल कहानी कहती फिल्मों का जो सिलसिला 2010 के बाद शुरू हुआ, उसमें अब बड़े स्टार्स भी कूदने लगे हैं। हाल ही में आई 'पैडमैन' इसका हालिया उदाहरण है। अक्षय कुमार जैसे सितारे भी अब स्टंट और कॉमेडी ही नहीं बल्कि सार्थक सिनेमा को तरजीह देने लगे हैं। इससे पहले अक्षय की 'टॉयलेट: एक प्रेम कथा' भी ऐसी ही फिल्म थी।
आम किरदारों से सजी फिल्मों की आ रही है बाढ़
हाल ही में ऋतिक रोशन की फिल्म 'सुपर 30' का फर्स्ट लुक रिवील किया गया था। फिल्म में ऋतिक रोशन पटना में आईआईटी के बच्चों के लिए 'सुपर 30' नाम से ही इंस्टीट्यूट चलाने वाले आंनद कुमार का किरदार अदा करेंगे। यह एक बॉयोपिक है। बॉयोपिक के जरिए स्टार्स अपनी छवि तोड़ने का जोखिम ले रहे हैं और ऋतिक रोशन इसका परफेक्ट उदाहरण हैं। अपनी सुपर ग्लैमरस इमेज और ग्रीक गॉड सरीखे लुक्स को किनारे रखकर ऋतिक 'कॉमन मैन' में बदल गए हैं।
'सुई-धागा' में वरुण का लुक ही है बदलते सिनेमा की पहचान
अकेले ऋतिक रोशन ही बदलते सिनेमा की नाव में सवार नहीं हुए हैं, बल्कि यंग सेंसेशन वरुण धवन ने भी अपनी फ्लटरी इमेज को अपनी अगली फिल्म के लिए पीछे छोड़ दिया है। फिल्म 'सुई-धागा' में उनके लुक्स तो यही इशारा कर रहे हैं। अपने समकक्ष अभिनेताओं के मुकाबले बॉक्स आॅफिस पर शानदार कलेक्शन करने का रिकॉर्ड रखने वाले वरुण सिनेमा के इस बदलते मिजाज को भांप गए हैं। ग्लैमरस छवि के किरदारों के साथ ही वरुण 'बदलापुर' और 'सुई-धागा' जैसी फिल्मों की स्क्रिप्ट को हां कर रहे हैं, तो इसके सीधे से मायने यही हैं कि वो जानते हैं कि मास को कनेक्ट करने के लिए अकेले 'हम्प्टी' से काम नहीं चलने वाला।
सिनेमा में बाकी एक्ट्रेस के मुकाबले ज्यादा फिट है आलिया
आलिया भट्ट के आईक्यू को लेकर भले ही आप कितने ही जोक बना लें, लेकिन सिनेमा में अपने किरदार को लेकर उनके आईक्यू पर आप सवाल नहीं उठा सकते। 'हाइवे' और 'उड़ता पंजाब' में आलिया के किरदार इसकी तस्दीक करते हैं कि यह अभिनेत्री क्यों बाकी एक्ट्रेस से जुदा है। इन दोनों ही फिल्मों में आलिया ने नॉन ग्लैमरस किरदारों को परदे पर न केवल निभाया, बल्कि क्रिटिक्स और दर्शक दोनों की वाहवाही लूटी। आलिया की ही तरह अनुष्का शर्मा और दीपिका पादुकोण, श्रद्धा कपूर, एश्वर्या रॉय बच्चन भी कॉमन मैन की कहानी कहती फिल्मों में दिलचस्पी लेने लगी हैं।
बहरहाल सिनेमा में आ रहा ये बदलाव सुखद है। अब केवल नाम के लिए ही 'राज' और 'राहुल' स्क्रीन पर गरीब नहीं दिखते, बल्कि पूरी फिल्म ही इस तरह से बन रही है कि किरदार के ज्यादा करीब रह सके।
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