हिंदी सिनेमा में एक नया चलन सामने आया है. साल 2025 में एक के बाद एक ऐसी फिल्मे आयी हैं, जो युद्ध पर आधारित हैं. यही नहीं साल 2026 में कई वॉर फिल्में रिलीज होने वाली हैं. आइए जानते हैं...
By: Yunus Khan | Published: January 26, 2026 9:20 AM IST
आज 26 जनवरी है. आप सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं.
हाल ही में रिलीज हुई है अनुराग सिंह की फिल्म बॉर्डर-2. असल में ये सन 1997 में आई जे.पी.दत्ता की फिल्म ‘बॉर्डर’ का स्टैंड-अलोन सीक्वेल है. यानी इस फिल्म में पुरानी बॉर्डर की कहानी आगे नहीं बढ़ती. बल्कि उन घटनाओं और लड़ाईयों का जिक्र है जो बॉर्डर में शामिल नहीं थीं.
एक बात और. बीते बरस हिंदी सिनेमा में एक नया चलन सामने आया है. साल 2025 में एक के बाद एक ऐसी फिल्मे आयी हैं, जो युद्ध पर आधारित हैं. पांच दिसंबर 2025 को रिलीज हुई थी आदित्य धर की फिल्म ‘धुरंधर’ जिसके मुख्य कलाकार थे-- रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, संजय दत्त, आर माधवन, अर्जुन रामपाल, राकेश बेदी वगैरह. यह चर्चित फिल्म पड़ोसी देश के लियारी इलाके में गैंगवार और भारतीय रॉ एजेंटों के ऑपरेशनों पर आधारित है. इसमें वास्तविक घटनाओं और कल्पना का रोचक मेल किया गया है. आप सभी जानते हैं कि इस फिल्म ने अब तक हंगामा मचा रखा है और ये भी तय है कि इसका सीक्वेल 19 मार्च को आने वाला है- जिसका माहौल अभी से बनना शुरू हो गया है.
इससे पहले 21 नवंबर 2025 को रिलीज हुई रजनीश घई के निर्देशन वाली फिल्म 120 बहादुर, जिसके कलाकार हैं फरहान अख़्तर, राशि खन्ना अजिंक्य देव वगैरह. फिल्म 120 बहादुर असल में 18 नवंबर 1962 को हुई रेजांग ला की लड़ाई पर आधारित है. भारत चीन युद्ध के दौरान हुई ये सबसे बड़ी लड़ाई थी. इस फिल्म में फरहान अख़्तर ने मेजर शैतान सिंह भाटी का किरदार निभाया है, जिन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र प्रदान किया गया था. इसके अलावा इस साल के पहले दिन रिलीज हुई श्रीराम राघवन की फिल्म इक्कीस. जो अभिनेता धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म है और सन 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के इर्दगिर्द घूमती है. ये फिल्म जांबाज फौजी अरूण खेतरपाल की जिंदगी पर आधारित है जो परमवीर चक्र हासिल करने वाले सबसे कम उम्र के फौजी अफसर थे. इक्कीस वो उम्र है जिसमें अरूण खेतरपाल शहीद हुए थे.
यही नहीं साल 2026 में कई वॉर फिल्में रिलीज होने वाली हैं. फरवरी के महीने में आयेगी अजय अनिरुद्ध के निर्देशन वाली फिल्म वीर मुरारबाजी—द बैटल ऑफ पुरंदर, अप्रैल के महीने में आ रही है अपूर्व लाखिया की सलमान खान के निर्देशन वाली फिल्म बैटल ऑफ गालवान जिसका टीजर हाल ही में आया है. बैटल ऑफ गालवान 15 और 16 जून 2020 की रात पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई एक हिंसक झड़प पर आधारित है. सन 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद ये अब तक का सबसे गंभीर टकराव था और इसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे.
ये सारी फेहरिस्त दिखाती है कि हिंदी सिनेमा में अचानक फिर से युद्ध पर आधारित फिल्मों की एक धारा चल पड़ी है. और ये कोई नया चलन नहीं है. हिंदी सिनेमा में युद्ध पर आधारित फिल्मों का एक लंबा इतिहास रहा है. हमारे यहां युद्ध पर आधारित फिल्मों का लंबा इतिहास रहा है—हिंदी सिनेमा की पहली वॉर फिल्म मानी जाती है सन 1964 में आई चेतन आनंद की ‘हकीकत’. ये फिल्म भारत चीन युद्ध में हुई रेजांग ला की कहानी पर ही आधारित थी. मुख्य कलाकार थे धर्मेंद्र, बलराज साहनी, प्रिया राजवंश, संजय खान, विजय आनंद, शेख मुख्तार वगैरह. इस फिल्म के गाने कैफी आजमी ने लिखे थे और संगीत था मदनमोहन का. क्या तो गाने थे इस फिल्म के. ‘कर चले हम फिदा वतन साथियो’ के बिना कोई राष्ट्रीय पर्व पूरा नहीं होता और फिर ‘होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा’ कलेजा चीर देने वाला गाना.
‘हकीकत’ भारत की सबसे ऑथेंटिक वॉर फिल्म मानी जाती है. ये ध्यान रखना चाहिए कि जिस दौर में ये फिल्म बनी तब फिल्म निर्माण की तकनीक उतनी विकसित नहीं थी. पर चेतन आनंद ने इस फिल्म में जान लगा दी थी और आज ये एक कल्ट फिल्म मानी जाती है. इसके बाद सन 1973 में चेतन आनंद लेकर आए फिल्म ‘हिंदुस्तान की कसम’. ये फिल्म 1971 के भारत-पाक युद्ध और भारतीय वायु सेना के शौर्य पर आधारित है. राजकुमार, विजय आनंद और बलराज साहनी जैसे दिग्गज कलाकारों ने इसमें अहम भूमिकाएं निभाईं. इसके बाद बरसों बरस तक युद्ध फिल्मे नहीं आयीं. ऐसी फिल्में जो बाकायदा सिर्फ युद्ध की कहानी पेश करती हों. फिर सन 1997 में जे पी दत्ता लेकर आए बॉर्डर. बॉर्डर सन 1971 के युद्ध के दौरान हुई लोंगेवाला की लड़ाई पर आधारित थी. इस लड़ाई में भारतीय वायुसेना ने एक बड़ी भूमिका निभायी थी. फिल्म में सनी देओल, जैकी श्रॉफ, सुनील शेट्टी, अक्षय खन्ना, पुनीत इस्सर, सुदेश बेरी और कुलभूषण खरबंदा मुख्य भूमिकाओं में थे.
बॉर्डर की कामयाबी से प्रेरित होकर जे पी दत्ता ने 2003 में एक और साहसिक फिल्म बनायी- एल ओ सी कारगिल. नाम से ही जाहिर है कि ये फिल्म मई 1999 में हुए भारतीय सेना के ऑपरेशन विजय पर आधारित थी, जिसमें भारतीय जांबाजों ने पाकिस्तान के घुसपैठियों को खदेड़ डाला था. एल ओ सी कारगिल बहुत बड़ी स्टार कास्ट वाली महत्वाकांक्षी फिल्म थी. हालांकि इसे वो कामयाबी नहीं मिल पाये जिसकी उम्मीद की जा रही थी. 2018 में जे पी दत्ता ने एक और युद्ध फिल्म बनायी—जिसका नाम था पल्टन. ये फिल्म सन 1967 के नाथू ला और चो ला संघर्ष पर आधारित थी. इस फिल्म में जे पी दत्ता का वो जादू नज़र नहीं आया जिसके लिए वो जाने जाते हैं. साल 2004 में फरहान अख्तर ने बनायी लक्ष्य. ये फिल्म एक बेफिक्र युवक की कहानी है, जो भारतीय सेना में शामिल होता है, लेकिन 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान एक अनुशासित नायक में बन जाता है.
आईये अब एक सरसरी निगाह डालते हैं हाल के वर्षों में एक के बाद एक कुछ और भी वॉर फिल्म्स पर.
2017 में आई...1971 के युद्ध के दौरान पनडुब्बी गाजी के रहस्यमयी घटना पर आधारित-द गाजी अटैक
2019 में आई आदित्य धर की फिल्म URI: The Surgical Strike. 2019 में ही आई सारागढ़ी की लड़ाई पर आधारित फिल्म केसरी, जिसमें हवलदार ईशर सिंह का किरदार अक्षय कुमार ने निभाया था. 2020 में आई फिल्म गुंजन सक्सेना. यह कहानी है भारत की पहली महिला युद्ध पायलट की, जिन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों के लिए आसमान में उड़ान भरी.
कैप्टन विक्रम बत्रा के जीवन पर आधारित 2021 में आई फिल्म शेरशाह. इसी बरस आई 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान IAF स्क्वाड्रन लीडर विजय कार्णिक की कहानी- भुज द प्राइड ऑफ इंडिया. सन् 2023 में आई मेघना गुलजार के निर्देशन वाली फिल्म सैम बहादुर. ये फिल्म भारत के पहले फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की कहानी है जिन्होंने चार दशकों में 5 युद्ध लड़े थे.
चलते चलते सवाल ये कि आखिर क्यों हिंदी सिनेमा युद्ध फिल्मों की ओर लौटता है. दरअसल सिनेमा एक कारोबार है और उसका मकसद है लोगों का मनोरंजन करते हुए पैसे कमाना. युद्ध फिल्मों में कहीं ना कहीं देशभक्ति का जज्बा छिपा होता है. लोग इन फिल्मों से फौरन कनेक्ट हो जाते हैं. फिर इन फिल्मों का संगीत भी एक आकर्षक तत्व बन जाता है. इधर के हालात के बाद देश की सेनाओं के प्रति आम लोगों की कृतज्ञता नये सिरे से बढ़ गयी है. वॉर फिल्म्स में दर्शकों को सब कुछ मिलता है, इमोशन, एक्शनऔर एंटरटेनमेंट. इधर सिनेमा की तकनीक लगातार उन्नत होती जा रही है—बेहतर विजुअल इफेक्ट्स, अद्भुत सिनेमेटोग्राफी और बेहतरीन साउंड वॉर फिल्म्स में चार चांद लगा देते हैं. इसलिए युद्ध पर आधारित फिल्मों का चलन इस समय जोरों पर है.
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