बॉलीवुड एक्टर गोविंदा की मुस्कान और उनके डांस स्टेप्स ने दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज किया है. लेकिन चकाचौंध भरी इस दुनिया के पीछे संघर्ष और मुंबई की लोकल ट्रेनों की धक्का-मुक्की की एक ऐसी कहानी छिपी है, जो बहुत कम लोग जानते हैं. एक पुराने इंटरव्यू में गोविंदा ने अपने शुरुआती दिनों को याद किया, जब वे सुपरस्टार नहीं बल्कि विरार के एक आम लड़के थे. आइए जानते हैं गोविंदा के जीवन के वो अनसुने किस्से, जो संघर्ष और मां के प्रति उनके प्रेम को बताते हैं.
लोकल ट्रेन का वो हादसा
गोविंदा ने बताया कि उनके लिए मुंबई की लोकल ट्रेनें सिर्फ सफर का हिस्सा नहीं, बल्कि जिंदगी की कहानी थीं. उन्होंने एक दिलचस्प किस्सा शेयर करते हुए कहा कि जब वे 18-19 साल के थे, तब वे काफी फिट थे और फुटबॉल खेलने के शौकीन थे. एक बार वे अपनी मां को लेकर पहली बार चर्चगेट स्टेशन गए. जैसे ही विरार लोकल स्टेशन पर रुकी, भीड़ का जबरदस्त झुंड आया. गोविंदा ने ट्रेन में चढ़ने की कोशिश की, लेकिन धक्का लगने से उनका संतुलन बिगड़ा और वे प्लेटफॉर्म पर गिर पड़े. यह देख उनकी मां बुरी तरह घबरा गईं और जोर-जोर से चिल्लाने लगीं "मेरा बच्चा! मेरा बच्चा!" स्टेशन पर मौजूद यात्री घबरा गए, उन्हें लगा कि भीड़ में कोई छोटा बच्चा गिर गया है. लेकिन जब लोगों ने पीछे मुड़कर देखा, तो वहां एक लंबा-चौड़ा, मजबूत जवान लड़का खड़ा था. गोविंदा मुस्कुराते हुए कहते हैं, "भले ही मैं जवान था, लेकिन मां की नजरों में तो मैं हमेशा उनका छोटा बच्चा ही रहा."
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मां बहू की तरह रखती थीं
गोविंदा का विरार से मुंबई तक का सफर करीब 21 सालों का रहा. वे अपनी मां के इतने आज्ञाकारी थे कि पूरे इलाके में उनके चर्चे थे. गोविंदा ने पुरानी यादों को याद करते हुए बताया कि विरार के लोग अक्सर उनका मजाक उड़ाते थे. वजह यह थी कि गोविंदा की मां उनसे घर के सारे काम करवाती थीं. सफाई हो या रसोई का काम, गोविंदा बिना किसी शिकायत के हर काम करते थे. गांव वाले अक्सर कहते थे, "तुम्हारी मां तुम्हें बेटे की तरह नहीं, बल्कि बहू की तरह घर के कामों में लगाए रखती हैं." गोविंदा ने इसे हमेशा एक आशीर्वाद की तरह लिया. ऐसी ही एंटरटेनमेंट खबरों को जानने के लिए पढ़ते रहिए बॉलीवुडलाइफ हिंदी.
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