बचपन में आपने अपने परिवार के साथ बैठकर सूरज बड़जात्या की फिल्में जरूर देखी होंगी। एक आदर्श नायक, प्रेमी, प्रेमिका, बहन, भाई, बेटा, पड़ोसी, टीचर, मेंटर और परिवारों के बीच चलने वाली नोंक-झोंक, नाराजगी और रूठना-मनाना सूरज की फिल्मों की यूएसपी रही हैं। शॉर्ट में कहूं तो सूरज ने इंडस्ट्री को 'प्रेम' दिया! प्रेम यानी कि अपना सलमान भाई। प्रेम यानी कि साथ में बैठकर एंटरटेंनमेंट का जरिया। सिनेमा के जरिए भारत के युवाओं को 'संस्कारी' बनाने का बीड़ा उठाने वाले डायरेक्टर सूरज बड़जात्या आज 54 के हो गए हैं और इसीलिए हमें भी अपने इस 'फैमिली' डायरेक्टर की इतनी तेज याद आ गई है।
फिल्मों में मिडिल क्लास फैमिली का ड्रामा रचने में सूरज का कोई तोड़ नहीं है। सूरज ने अपनी फिल्मों में मुहल्लों के बीच पलने वाला भारत दिखाया, जिसके हीरो को नौकरी ढूंढकर आत्मनिर्भर भी बनना था और अपने फैमिली के बिजनेस को खड़ा करने के लिए दिन-रात भी एक करनी थी। इसके अलावा भी हीरो के कुछ खास टास्क होते थे, जैसे हीरो इतना संस्कारी होता था कि गाना भी 'पहला-पहला प्यार है' ही बजाना पड़ता था! 'फर्स्ट लव' के लिए 'फुल डेडीकेशन' के बिना सूरज की फिल्में अधूरी सी लगती हैं।
एक्ट्रेस के लिए भी था बड़जात्या का अपना पैमाना
ऐसे ही सूरज की नायिकाओं के भी अपने 'एथिक्स' यानी कि नैतिक मूल्य होते थे। मसलन सूरज की फिल्मों की हिरोइन, हीरो से ज्यादा संस्कारी होती हैं। उन्हें भी अच्छी प्रेमिका, अच्छी बेटी, अच्छी बहन और अच्छी दोस्त बनना जरूरी होता था।
कुल मिलाकर बड़जात्या ने उस क्लास की नब्ज पकड़ ली थी जो अपने बच्चों में 'सूरज वाले संस्कार' देखना चाहते थे। 'आत्मसम्मान' और 'दया' जैसे गुण सूरज की फिल्मों में विलेन के भीतर भी होते थे। आपको तो याद ही होगा कि कैसे बड़जात्या की फिल्मों का विलेन कितना भी दुष्ट क्यों न हो फिल्म के अंत में उसे परिवार याद आ ही जाता था। अच्छा गलत तो नहीं कह रहे न हम! आप उनकी फिल्मों के क्लाइमेक्स देख सकते हैं...
'मैने प्यार किया', 'हम आपके हैं कौन', 'हम साथ-साथ हैं', 'विवाह' और 'प्रेम रतन धन पायो' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने वाले सूरज बड़जात्या ने अपना फिल्मी सफर 1987-88 के दौरान शुरू किया। उनकी पहली फिल्म 'मैने प्यार किया' 1989 में रिलीज हुई थी और इसी फिल्म के जरिए सलमान खान के रूप में इंडस्ट्री को सुपरस्टार मिला था। इसी फिल्म के जरिए भाग्यश्री ने भी अपना बॉलीवुड डेब्यू किया था।
खैर, सूरज बड़जात्या ने आम भारतीय परिवारों की बहुत सी छोटी-छोटी बातों को अपनी फिल्मों में 'मेन इवेंट' की तरह पेश किया। आपको 'हम आपके हैं कौन' फिल्म की अंताक्षरी का सीन तो याद ही होगा। ऐसे ही बहुत सी बातें आप इस डायरेक्टर की फिल्मों में अब भी नोट कर सकते हैं। राजश्री प्रोडक्शन की दरअसल खासियत ही थी फैमिली ड्रामा से भरी हुई फिल्मों का निर्माण करना और इस परंपरा को सूरज बड़जात्या ने बड़े स्केल पर आगे बढ़ाया। आज भी सूरज बड़जात्या कुछ नई कहानियों पर काम कर रहे हैं। सूरज बड़जात्या को याद करते हुए आपको भी ये सारी बातें जरूर याद आ ही जाती होंगी। नहीं तो फिर आपने सूरज बड़जात्या की फिल्मों को ठीक से देखा ही नहीं..हम तो यही मानेंगे!
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