अगर हिस्से में सांसों का कुछ और खजाना होता तो 99 बरस की होतीं कामिनी कौशल

Kamini Kaushal Birth Anniversary: वेटरन एक्ट्रेस कामिनी कौशल ने बीते साल 2025 में नवंबर में दुनिया को अलविदा कह दिया था. आज उनकी 99वीं बर्थ एनिवर्सरी है.

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By: Yunus Khan | Published: January 16, 2026 9:57 PM IST

यूनुस खान
अगर उनके हिस्से में सांसों का खजाना कुछ महीने और होता तो आज वो अपना 99वां जन्मदिन मना रही होतीं. और अगर जीवन की लकीर इससे भी ज्यादा होती तो वो अगले बरस अपने सौ बरस मनातीं. पर अफसोस 14 नवंबर, 2025 को इस अभिनेत्री ने आखिरी सांस ली. बाल दिवस से उनका क्‍या ताल्‍लुक है आगे बताऊंगा. हम कामिनी कौशल की बात कर रहे हैं. एक मौका ऐसा आया था जब उनसे मुलाकातें हुईं. उनकी जिंदगी की कहानी उनसे सुनने को मिली और मन उनके प्रति सम्मान से भर गया था. मैंने अहमदाबाद में उनके साथ एक बड़ा भव्य कार्यक्रम किया था. आज भी उसकी यादें मेरे जेहन में हैं. वो जिंदगी से लबरेज महिला थीं. गरिमामय और शानदार.

कामिनी कौशल का असली नाम था उमा कश्‍यप. उमा एक ऐसे परिवार में पैदा हुई थीं जहां पढ़ाई-लिखाई का माहौल था. उनके पिता थे रायबहादुर शिवराम कश्‍यप. बॉटनी की दुनिया की एक बहुत बड़ी हस्ती. अकादमिक दुनिया में उन्हें Father of Indian Bryology के नाम से याद किया जाता है. उन्होंने लाहौर विश्वविद्यालय के बॉटनी डिपार्टमेंट की स्थापना की थी. उन्होंने लाहौर के मशहूर बोटेनिकल गार्डन की भी स्थापना की थी. बॉटनी की उनकी किताबें आज भी चलन में हैं. पंजाब यूनिवर्सिटी का एक पूरा ब्‍लॉक कश्‍यप साहब के नाम पर है. ऐसे नामी प्रोफेसर के बच्‍चों का ध्‍यान तो पढ़ाई की तरफ होना ही था. उमा के एक भाई थे डॉक्टर केदारनाथ कश्यप, जो एक सर्जन थे जबकि दूसरे भाई कर्नल अमरनाथ कश्यप फौज में थे, वो रॉयल बॉम्‍बे इंजीनियर्स ग्रुप के असिस्‍टेंट कमांडेंट रहे.

कामिनी जी ने खुद मुझे बताया था कि बचपन से खेलों में उनकी दिलचस्पी बहुत थी. वो उस दौर में भी घुड़सवारी करती थीं. इसके अलावा वो तैराकी करती थीं, साइकिल चलातीं और स्केटिंग भी करती. उन्होंने लाहौर के Kinnaird कॉलेज से इंग्लिश लिटरेचर में BA किया था. उन दिनों वो रेडियो में प्‍ले भी करती थीं. मजेदार बात ये है कि चेतन आनंद उनके भाई के दोस्त थे. जब वो 'नीचा नगर' बना रहे थे उस दौरान उन्होंने उमा को रेडियो पर सुना और उन्हें फिल्म में काम देने की पेशकश की. चूंकि चेतन आनंद की पत्नी उमा भी फिल्म में थीं इसलिए उमा कश्यप का नाम बदल कर रख दिया गया कामिनी कौशल. ‘'नीचा नगर' पहली भारतीय फिल्‍म थी जिसने कांस फिल्‍म फेस्टिवल में बेस्‍ट फिल्‍म का अवॉर्ड जीता था.

इसके बाद कामिनी कौशल ने फिल्मिस्तान की फिल्म 'दो भाई' में काम किया. ये फिल्म खूब चली. इस फिल्‍म का गाना 'मेरा सुंदर सपना बीत गया' आज भी याद किया जाता है. कामिनी कौशल अपने जमाने की सबसे कामयाब अदाकारा थीं. उन्होंने राज कपूर, देव आनंद और दिलीप कुमार तीनों के साथ काम किया. राज कपूर के साथ जेल यात्रा और आग, देव आनंद के साथ जिद्दी, शायर और नमूना और दिलीप कुमार के साथ शहीद, नदिया के पार, शबनम और आरजू. कामिनी कौशल ने बिमल रॉय की फिल्‍म ‘बिराज बहू’ में भी काम किया था. ये फिल्‍म शरतचंद्र चट्टोपाध्‍याय के इसी नाम के उपन्‍यास पर आधारित थी. कामिनी जी ने मुझे बताया था कि इस फिल्‍म की शूटिंग के दौरान वो कई बार जज्बाती हो गयी थीं. ये फिल्‍म कांस फिल्‍म फेस्टिवल में गोल्‍डन पाम के लिए नॉमिनेट हुई थी. नेशनल फिल्‍म अवॉर्ड्स में इसे बेस्‍ट फिल्‍म करार दिया गया था. इस फिल्‍म के लिए कामिनी कौशल ने बेस्‍ट एक्‍ट्रेस का फिल्‍मफेयर अवॉर्ड भी जीता था.

दिलीप कुमार और कामिनी कौशल एक-दूसरे को बहुत पसंद करते थे. पर कामिनी पहले से शादीशुदा थीं. इसलिए ये रिश्‍ता किसी अंजाम तक नहीं पहुंचा. दिलीप कुमार ने अपनी आत्मकथा में जिक्र भी किया है कि कामिनी कौशल बहुत इंटलेक्‍चुअल थीं. सबसे अलग. और इसलिए वो उन्‍हें पसंद करने लगे थे. मुझे बहुत बुरा लगा था जब कामिनी जी की मौत पर पूरे सोशल मीडिया ने उन्‍हें दिलीप साहब से जोड़कर याद किया जाता रहा. क्या एक दमदार अभिनेत्री, एक बेहतरीन शख्सियत और एक प्रबुद्ध महिला को केवल उनके अधूरे रिश्ते से जोड़कर याद करना चाहिए. बाकी सारी चीजो को नजरअंदाज कर दिया जाए.

मनोज कुमार की 'शहीद' कामिनी जी की शानदार भ‍ूमिका के लिए याद की जाएगी. इस फिल्‍म में वो भगत सिंह की मां बनी थीं. प्रेम धवन ने उनके लिए गाना रचा था, 'तू ना रोना कि तू है भगत सिंह की मां.' इसके बाद मनोज कुमार के लिए उन्‍होंने उपकार, पूरब और पश्चिम, रोटी कपड़ा और मकान, शोर, सन्‍यासी और दस नंबरी जैसी फिल्‍में भी कीं. कामिनी कौशल ने त्रिलोक जेटली की फिल्‍म गोदान में 'धनिया' का किरदार निभाया था. ये फिल्‍म मुंशी प्रेमचंद के उपन्‍यास पर बनी थी. कामिनी जी ने मुझे बताया था कि उन्होंने कुछ फिल्मों का निर्माण भी किया था जिनमें शामिल थी 'चालीस बाबा और एक चोर'. इस फिल्म का निर्देशन पी एल संतोषी ने किया था.

शायद कामिनी कौशल फिल्‍म संसार में सबसे ज्यादा उम्र तक काम करने वाली अभिनेत्री कही जा सकती हैं. उन्‍होंने 2013 में चेन्‍नई एक्‍सप्रसे की, 2019 में कबीर सिंह की और 2022 में लाल सिंह चड्ढा में काम किया. तब उनकी उम्र 95 बरस की थी. मैंने पहले ही कहा कि बाल दिवस पर कामिनी जी का जाना बड़ा मानीखेज था. क्‍योंकि कामिनी कौशल का एक बड़ा योगदान है बच्चों के लिए बनाये उनके पपेट शो. खेल खिलौने, चांद सितारे, चाट पानी और चंदामामा उनके मशहूर पपेट शो थे. कम लोग जानते हैं कि उन्होंने विविध भारती के लिए कुछ नाटकों में भी काम किया था. आज उनका जन्‍मदिन है. हम कामिनी कौशल को शिद्दत से याद कर रहे हैं. उन्‍हें नमन.