बला की सुंदर एक्ट्रेस जिसने 80 के दशक में बॉलीवुड पर राज किया और जिसके आने से सिनेप्रेमियों को अगली हेमा मालिनी, मधुबाला और मीना कुमारी सरीखी वो अदाकारा मिल गई थी जिसकी तलाश सिनेमा के चाहने वालों को हमेशा रहती है। श्रीदेवी ने अपनी खूबसूरती और बेहतरीन डांस से लोगों के दिलों को धड़कनों को बेकाबू कर दिया था। लोगों के दिलों पर राज करने वाली बॉलीवुड की इस दिवा के कुछ ऐसे रहस्य भी है जो शायद आपको न पता हो।
श्रीदेवी नहीं था असली नाम
श्रीदेवी का असली नाम श्री अम्मा अयंगर अयप्पन था। शुरुआत में श्रीदेवी ने हिंदी नहीं बल्कि तमिल, तेलगू, मलयालम और कन्नड़ फिल्में की। श्रीदेवी अकेली एक्ट्रेस रहीं जिन्होंने दक्षिण की चारों भाषाओं वाली फिल्मों में काम किया। श्रीदेवी ने 1960 से ही फिल्मों में काम करना शुरु कर दिया था लेकिन पहली बार उन्हें मलयालम फिल्म 'पोमबाता' (1971) में बतौर बाल कलाकार के रुप में राज्य सरकार ने पुरस्कार दिया था।
डबल रोल की मल्लिका
सिनेमाई पर्दे पर श्रीदेवी ने सबसे ज्यादा डबल रोल की भूमिकाएं निभाईं। श्रीदेवी ने करीब 7 फिल्मों में डबल रोल किए। यह फिल्में थीं गुरू, नाकाबंदी, चालबाज, बंजारन, खुदा गवाह, लम्हें और गुरुदेव।

फिल्मी विरासत
दरअसल श्रीदेवी की मां राजेश्वरी ने एसएस वासन की तेलुगू हिट फिल्म 'शांति निवासम' में एक स्पेशल रोल निभाया था जिसका बाद में हिंदी रीमेक फिल्म 'घराना' के जरिए हुआ।
श्रीदेवी को मिला 'लकी' ब्रेक
बालू महेंद्रु जब अपनी तेलगू हिट फिल्म 'मोनाद्रम पिराई' का हिंदी रीमेक 'सदमा' बनाने की तैयारी में थे तब उनकी पहली पसंद श्रीदेवी नहीं थी। इसके लिए उनकी पहली पसंद डिंपल कपाड़िया थी जिसके लिए वो उनके पास गए भी थे। हालांकि उस वक्स डिंपल अपने हाई-प्रोफाइल कमबैक के लिए फिल्म 'सागर' की शूटिंग में बिजी थी और उन्होंने इस फिल्म के लिए डेट नहीं थी थी।

जूली नहीं थी पहली फिल्म
हालांकि अभी तक अक्सर यही समझा जाता है कि श्रीदेवी की पहली बॉलीवुड फिल्म जूली थी लेकिन दरअसल इनकी पहली हिंदी फिल्म बतौर बाल कलाकार थी 'रानी मेरा नाम ऐसा (1972)'। यह फिल्म तेलगू फिल्म 'राउडी रानी' की रीमेक थी।
ऑरिजनल 'जुम्मा-चुम्मा गर्ल'
80 के दशक में शोले फिल्म के डायरेक्टर रमेश सिप्पी ने अमिताभ बच्चन और श्रीदेवी के साथ एक फिल्म का ऐलान किया था। इस फिल्म में दोनों के ही डबल रोल होने थे जिसकी घोषणा मुंबई में एक बड़े कार्यक्रम के दौरान की गई थी। इस फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन का हिट गाना 'जुम्मा-चुम्मा दे दे' को कंपोज किया गया था हालांकि बाद में यह फिल्म नहीं बन सकी और यह गाना अमिताभ बच्चन की ही दूसरी फिल्म 'हम' में इस्तेमाल हुआ।
अपनी आवाज में पहली फिल्म थी 'चांदनी'
श्रीदेवी के पिता तमिल थे और मां तेलगू इसीलिए दोनों ही भाषाओं पर श्रीदेवी की अच्छी पकड़ थी लेकिन उनकी चाइल्डिश आवाज से फिल्मों के निर्माता-निर्देशक संशय की स्थिति में रहते थे और इसीलिए हिंदी फिल्मों में श्रीदेवी की आवाज के लिए हमेशा डबिंग का सहारा लिया जाता था। रेखा ने उनकी आवाज के लिए फिल्म आखिरी रास्ता में डबिंग की थी इसके अलावा उन्होंने श्रीदेवी की मलयालम फिल्मों के लिए भी डबिंग की थी। लेकिन श्रीदेवी की आवाज को पहचान पहली बार मिली यश चोपड़ा की फिल्म चांदनी से। इस फिल्म में उनकी ओरिजनल आवाज को ही रखा गया था।

'बाजीगर' के लिए पहली पसंद थी श्रीदेवी
सस्पेंस फिल्मों के लिए मशहूर निर्देशक अब्बास-मस्तान जब अपनी फिल्म 'बाजीगर' पर काम कर रहे थे तब उनकी इस फिल्म के लिए पहली पसंद श्रीदेवी थी। उन्होंने श्रीदेवी को इस फिल्म के लिए डबर रोल के लिए अप्रोच किया था हालांकि श्रीदेवी के इससे मना करने के बाद अब्बास-मस्तान ने इन रोल्स के लिए काजोल और शिल्पा शेट्टी को साइन कर लिया था। इसके अलावा फिल्म 'बागबां', 'मोहब्बतें' और 'रंगीला' भी श्रीदेवी ने छोड़ दी थी।
दिव्या भारती की फिल्म 'लाडला' को किया था पूरा
दिव्या भारती की अचानक मौत के बाद श्रीदेवी ने उनकी अंतिम और अधूरी फिल्म 'लाडला' को साइन किया था।
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