पद्मावत फिल्म समीक्षा: संजय लीला भंसाली ने अलाउद्दीन खिलजी की क्रूरता, राजा रतन सिंह की सहजता और रानी पद्मावती के त्याग को भली भांति पर्दे पर उतारा है

देश के राजपूती मान-सम्मान को सलाम करती है संजय लीला भंसाली की नई फिल्म 'पद्मावत'

WrittenBy
By: Rahul Sharma | Published: January 25, 2018 1:26 PM IST

फिल्म पद्मावत के कारण पिछले कुछ दिनों से देश में जिस तरह का माहौल बना हुआ है, उसकी वजह से दर्शकवर्ग यह जानने के लिए आतुर है कि आखिरकार निर्देशक संजय लीला भंसाली ने फिल्म में ऐसा क्या दिखाया है कि देश का राजपूत समाज बेचैन हो उठा है ? आखिरकार जिस कहानी को संजय ने पर्दे पर उतारा, वो तो कई सालों से लोक कथाओं के माध्यम से देश में ज़िंदा है। क्या विरोध करने वाले समूह किसी राजनैतिक महत्वकांक्षा के कारण फिल्म का विरोध कर रहे हैं या फिर संजय लीला भंसाली ने वाकई अपनी सहूलियत के मुताबिक ऐतिहासिक तथ्यों के साथ तोड़-मरोड़ की है ? चलिए आपको बताते हैं....

फिल्म की कहानी:

फिल्म पद्मावत की कहानी को निर्देशक संजय लीला भंसाली ने मलिक मोहम्मद जायसी की रचना पद्मावत और भारतीय समाज में प्रचलित लोक कथाओं के मिश्रण से तैयार किया है। जहां एक तरफ अलाउद्दीन खिलजी (रणवीर सिंह) अपने ससुर जलालुद्दीन खिलजी (रज़ा मुराद) की धोखे से हत्या करके दिल्ली के तख्त पर आसीन हो जाता है, वहीं दूसरी तरफ महाराजा रावल रतन सिंह (शाहिद कपूर) सिंघल देश की राजकुमारी पद्मावती (दीपिका पादकोण) को अपनी दूसरी पत्नि बनाकर चित्तौड़ ले आते हैं। [इसे भी पढ़ें- बॉक्स ऑफिस : क्या रणवीर सिंह की 'पद्मावत' सलमान खान की 'टाइगर जिंदा है' को पिछाड पाएगी ?]

महाराजा रावल रतन सिंह के राज्यगुरू रानी पद्मावती को देखते ही उन पर मोहित हो जाते हैं, जैसे ही इस बात की जानकारी महाराजा रावल रतन सिंह को होती है वो पद्मावती के सुझाव पर अपने राज्यगुरू को देश निकाला दे देते हैं। अपने अपमान का प्रतिशोध लेने के लिए चित्तौड़ के राज्यगुरू यह शपथ लेते हैं कि वो महाराज रतन सिंह के राज्य को मिट्टी में मिला देंगे। इसके बाद वो दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के पास पहुंचते हैं और उन्हें पद्मावती की सुंदरता की कहानी सुनाकर मोहित करते हैं। फिर शुरू होता है वो युद्ध जिसका अंत पद्मावती के जौहर के साथ होता है।

कलाकारों की अदाकारी:

फिल्म की कहानी मुख्यत: तीन किरदारों महारानी पद्मावती, महाराजा रतन सिंह और अलाउद्दीन खिलजी के आस-पास ही घूमती है। इसलिए सबसे पहले हम उन तीन कलाकारों की बात करते हैं, जिन्होंने इन तीनों का किरदार निभाया है:

1. महारानी पद्मावती:

फिल्म पद्मावत में महारानी पद्मावती का किरदार दीपिका पादुकोण ने निभाया है। वो इससे पहले संजय के साथ राम-लीला और बाजीराव-मस्तानी जैसी फिल्में कर चुकी हैं। उनको पता था कि पद्मावती के किरदार की मांग क्या है और संजय उनसे क्या चाह रहे है ? वो पर्दे पर उसे उतारने में कामयाब भी रहती हैं। पद्मावती के बारे में बताया जाता है कि वो सुंदरता और वीरता का एक संपूर्ण मिश्रण थी, दीपिका दर्शकों को यह अहसास दिलाने में कामयाब रहती हैं। अगर ऐसा कहा जाए कि दीपिका पादुकोण ने महारानी पद्मावती के किरदार में जान फूंक दी है तो शायद गलत नहीं होगा।

2. अलाउद्दीन खिलजी:
जिस इंसान ने अपनी महत्वकांक्षा के चलते अपने ही ससुर की धोखे से हत्या कर दी हो, वो कितना क्रूर रहा होगा इसका अंदाजा आप आसानी से लगा सकते हैं। रणवीर सिंह अपनी अदाकारी से अलाउद्दीन खिलजी के किरदार को बड़े पर्दे पर जीवंत करने में कामयाब रहते हैं। फिल्म के दौरान कुछ-कुछ जगहों पर वो इतने खूंखार दिखते हैं कि आप सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि अलाउद्दीन खिलजी अपनी ख्वाइशों को पूरा करने के लिए कितना पागल रहा करता होगा ? रणवीर सिंह ने इस फिल्म के लिए काफी मेहनत की है, जो कि पर्दे पर साफ-साफ दिखती है।

3. महाराजा रावल रतन सिंह:

यह सब जानते थे कि फिल्म पद्मावत में अलाउद्दीन खिलजी का किरदार महाराजा रावल रतन सिंह के किरदार से ज्यादा वजनदार है। ऐसे में शाहिद कपूर ने महाराजा रावल रतन सिंह बनने का फैसला लेकर वाकई साहस का काम किया है। शायद यह शाहिद कपूर का साहस ही था, जो फिल्म के दौरान दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब रहता है। फिल्म में शाहिद कपूर बहुत ही संयमित अदाकारी करते हुए दिखते हैं। उन्हें पर्दे पर देखकर आपको राजपूती आन-बान और शान का अहसास होता है। [इसे भी पढ़ें- शाहिद, दीपिका और रणवीर की इस फिल्म के पहले भाग को ये 5 बातें बनाती है खास]

इन तीनों कलाकारों के अलावा अदिति राव हैदरी, रज़ा मुराद, और जिम सार्ब ने महत्वपूर्ण भूमिकायें निभायी हैं। जो अपने-अपने किरदार में प्रभावित करते हैं।

फिल्म का निर्देशन:

इस बात में किसी प्रकार का शक नहीं है कि संजय लीला भंसाली भारतीय सिनेमा के सबसे बेहतरीन निर्देशकों में से एक हैं लेकिन इस बार वो मात खा गए हैं। फिल्म भले ही दर्शकों को लगातार बांधे रखने में कामयाब रहती है लेकिन समय के साथ दर्शकों का उत्साह जिस स्तर पर पहुंचना चाहिए था, वो पद्मावत के दौरान नहीं हो पाता है। इसकी एकमात्र वजह फिल्म पद्मावत को फिल्माने का तरीका है। बाहुबली सीरीज के बाद दर्शकों को यह उम्मीद थी कि संजय लीला भंसाली पद्मावत में उस स्तर को छुयेंगे लेकिन ऐसा हो नहीं पाया है। फिल्म पद्मावत के कई दृश्य ऐसे हैं जिनको देखकर लगता है कि यह तो हम बाजीराव मस्तानी के दौरान भी देख चुके हैं। [इसे भी पढ़ें- क्या फिल्म ‘पद्मावत’ के साथ 100 करोड़ के क्लब में एंट्री कर पायेंगे शाहिद कपूर ?]

हालांकि फिल्म का अंत संजय लीला भंसाली ने जिस तरह से फिल्माया है वो काबिल-ए-तारीफ है। उस समय ऐसा लगता है कि फिल्म एक अलग ही स्तर पर पहुंच गई है लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी होती है।

फिल्म का संगीत:

फिल्म पद्मावत का संगीत संजय लीला भंसाली ने ही दिया है। उन्हें पता था कि उनकी फिल्म में किस जगह पर कैसा गाना चाहिए ? उन्होंने उसको ध्यान में रखकर ही संगीत की रचना की थी। इसका फायदा यह हुआ कि कहीं पर भी फिल्म की रफ्तार नहीं रुकती है। फिल्म का लगभग हर एक गाना कहानी को मदद करता है। साथ ही संजय लीला भंसाली ने फिल्म के सभी गानों को बहुत ही खूबसूरती से फिल्माया है।

आखिरी फैसला:

फिल्म पद्मावत को लेकर अंतिम फैसला सुनाने से पहले हम आपको दो बातें बताना चाहते हैं। पहली तो यह कि जिस राजपूती मान-सम्मान को लेकर इतने दिनों से विवाद हो रहा है, संजय ने उसका फिल्म के दौरान पूरा ख्याल रखा है। फिल्म को देखते समय आपको गर्व होता है कि आपने उस देश में जन्म लिया है, जहां कभी गोरा-बादल और महाराजा रावल रतन सिंह जैसे शूर-वीर योद्धाओं का जन्म हुआ था। दूसरी यह कि फिल्म पद्मावत में कहीं भी रणवीर सिंह और रानी पद्मावती के बीच स्वप्न दृश्य या प्रेम प्रसंग नहीं है।

अब आते हैं इस बात पर कि क्या पद्मावत को देखने के लिए सिनेमाघरों का रुख करना चाहिए ? तो हम आपको बता दें कि पद्मावत आपको भारतीय होने का गर्व कराती है। हमारे मुताबिक यह सबसे बड़ी वजह है आप इस फिल्म को देखने के लिए सिनेमाघरों का रुख करें। इसके साथ-साथ पद्मावत में आपको रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण और शाहिद कपूर की जबरदस्त अदाकारी भी देखने को मिलती है। बॉलीवुड लाइफ हिन्दी अपनी तरफ से पद्मावत को 3.5 स्टार देता है। आप इस फिल्म को देखें और हमें कमेंट के माध्यम से बतायें कि आपको यह कैसी लगी ?