जॉन अब्राहम और मनोज बाजपेई की 'सत्यमेव जयते' आखिरकार बॉक्स आॅफिस पर रिलीज हो गई है। देशभक्ति के रैपर में लिपटी हुई 'सत्यमेव जयते' दरअसल एक एक्शन मसाला फिल्म है। फिल्म का फर्स्ट हाफ देखते हुए कई जगह आपको मजा आता है तो कई जगह आपको वो पॉलिटिकल डायलॉग सुनाई देते हैं, जो पिछले दिनों सुर्खियों में रहे हैं। मिलाप मिलन झावेरी ने आॅडियंस से कनेक्ट करने के लिए पीएम मोदी के भी कुछ पॉपुलर शब्दों को डायलॉग में ढ़ाला है, जो कई जगह बोझिल और जबरन लगते है। फिल्म के एक्शन अच्छे है।
फिल्म पहले सीन से ही दर्शकों को अहसास दिलवा देती है कि आगे और भी दिलचस्प एक्शन देखने को मिलने वाला है। 'सत्यमेव जयते' फिल्म में एक सीक्रेट कोड है, लेकिन ये बहुत जल्दी खुल जाता है। फिल्म कई जगह प्रिडक्टेबिल लगती है। फिल्म के डायलॉग लिखने में मिलाप झावेरी ने जितनी मेहनत की है उतनी कहानी को और अधिक ट्विस्ट देने में करते तो शायद ये खालिस मसाला एंटरटेनर दर्शकों को और ज्यादा रोमांचित करती। फिल्म की कहानी भी आम है, लेकिन इसे खास बनाती है मनोज और जॉन के धमाकेदार सींस।
फिल्म की कहानी मुंबई से शुरू होती है। वीर राठौर (जॉन अब्राहम) भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हुए पुलिसकर्मियों को अपने अंदाज में सबक सिखाता है। दरअसल वीर के पिता शिव राठौर पर झूठा आरोप लगाया गया था, जिसके बाद वह आत्महत्या कर लेता है। यहीं से वीर का मकसद ही बन जाता है कि वह भ्रष्ट पुलिसकर्मियों को सबक सिखा ही रहेगा। वीर एक—एक कर भ्रष्ट पुलिसकर्मियों को बुरी मौत देता जा रहा है, इसके उलट पुलिस महकमा इन हत्याओं से सिहर उठा है। पूरे पुलिस महकमे में अफरा-तफरी है। इस केस से निपटने के लिए अब सीन में पुलिस अफसर शिवांश राठौर (मनोज बाजपेयी) की एंट्री होती है। शिवांश समझ जाता है कि जो भी इन घटनाओं के पीछे है उसका मकसद भ्रष्ट पुलिसकर्मियों को सबक सिखाना है, लेकिन वह कानून को सबसे ऊपर मानता है। इसी बीच कहानी में शिखा (आयशा शर्मा) की एंट्री होती है। कहानी नया मोड़ लेते हुए इंटरवल के करीब पहुंच जाती है।
कुल मिलाकर देखें पहले पार्ट में एक्शन आपको बांधे रखते हैं। पूरी फिल्म कैसी है ये जानने के लिए आप बनें रहिए बॉलीवुड लाइफ हिंदी के साथ।
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