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'सत्या' के लिए 2 लाख की कमाई छोड़कर 20 हजार पर काम करने को राजी हो गए अनुराग कश्यप, ये है दिलचस्प कहानी!

अनुराग जब मुंबई पहुंचे तब उन्होंने राइटिंग और थिएटर का दामन थामा।

By: Gaurav Nauriyal  |  Published: September 10, 2018 1:56 PM IST

'सत्या' के लिए 2 लाख की कमाई छोड़कर 20 हजार पर काम करने को राजी हो गए अनुराग कश्यप, ये है दिलचस्प कहानी!

अनुराग कश्यप! नाम ही काफी है? दरअसल बॉलीवुड में फिल्ममेकर्स तो कई हुए लेकिन अनुराग कश्यप जैसे अपनी धुन के पक्के और स्टैंड लेने वाले डायरेक्टर्स कम ही नजर आते हैं। अनुराग को न तो कभी विवादों से ऐतराज रहा है और ना ही अपने क्राफ्ट के लिए सेंसर बोर्ड तक से भिड़ जाने में इस विरले डायरेक्टर को कभी गुरेज रहा हो। अनुराग कश्यप का 10 सितंबर को बर्थडे है और उनकी अपकमिंग फिल्म 'मनमर्जियां' रिलीज के लिए तैयार है।

खैर, अनुराग कश्यप बदलती फिल्म इंडस्ट्री में उस दौर में दाखिल हुए जब बड़े प्रोडक्शन हाउस एनआरआई आॅडियंस के लिए ज्यादा फिल्में बनाने लगे थे। इन फिल्मों का हीरो होता तो एकदम देसी था, लेकिन चमक-दमक और मंहगे शौक वाला। इसी फेक से लगते हीरो को मानों अनुराग ने सिल्वर स्क्रीन पर बदलने की ठान ली थी। अनुराग जब मुंबई पहुंचे तब उन्होंने राइटिंग और थिएटर का दामन थामा। थिएटर में बतौर एक्टर उन्हें अच्छा काम भी मिल रहा था और मजा भी आ रहा था। इसके साथ ही अनुराग कश्यप टेलीविजन के लिए राइटिंग भी कर रहे थे।

ये वो दौर था जब टेलीविजन पर डेली शोप की शुरुआत ही हो रही थी। धीरे-धीरे अनुराग कश्यप को टीवी में राइटिंग का काम मिलने लगा। अनुराग कश्यप उन निर्देशकों में हैं जिन्हें राइटिंग में भी महारथ हासिल है। हाल ही में नेटफ्लिक्स की 'द क्रिएटिव इंडियन सीरीज' रिलीज हुई है और इसमें एक चैप्टर अनुराग कश्यप पर ही बेस्ड है। अनुराग ने इसमें खुद अपने फिल्मी सफर के बारे में कई बातें शेयर की हैं।

इस सीरीज में अनुराग ने बताया है कि कैसे वह एक ही दिन में तीन-तीन एपिसोड लिख लेते थे और इसके चलते उनकी डिमांड बढ़ती गई। जब वह फिल्मों में नहीं आए थे, तब वह टीवी के लिए ही राइटिंग कर रहे थे। इस काम से अनुराग 2 लाख रुपये तक प्रतिमाह कमा रहे थे, लेकिन फिर उन्हें रामगोपाल वर्मा का बुलावा आया। रामू 'सत्या' के आइडिया पर काम कर रहे थे और उन्हें इसके लिए राइटर चाहिए थे। रामू की फिल्म के एवज में अनुराग कश्यप को 20 हजार रुपये प्रतिमाह ही मिल पाने थे, लेकिन बावजूद इसके अनुराग टीवी से अब बड़े पर्दे पर छलांग लगाने के लिए तैयार थे। उन्होंने ये आॅफर स्वीकार कर लिया और साथ में सह-लेखक के तौर पर सौरभ शुक्ला को इस प्रोजेक्ट में शामिल करवाया।

'सत्या' के लिए भीखू म्हात्रे जैसा यादगार किरदार ​रचा गया। भीखू लग्जरी गाड़ियों वाला नकली डॉन नहीं था, बल्कि भारत के उन खालिस डॉन का सिल्वर स्क्रीन पर प्रतिरूप था, जिनकी मुंबई में एक दौर में तूती बोलने लगी थी। कैरेक्टर रियल लगे इस पर खूब मंथन हुआ। नाम क्या रखा जाए...तब अनुराग ने रामगोपाल वर्मा के रसोइए भीखू का नाम सुझाया। अब दूसरा सवाल था भीखू आया कहां से, उसका बैकग्राउंड कैसा हो? तो इसके जवाब में भीखू की पृष्ठभूमि हो गई मराठी और इस कैरेक्टर को सरनेम मिला म्हात्रे। ये किरदार मनोज बाजपेयी ने निभाया था।

खैर, अनुराग ने इस फिल्म के साथ बतौर राइटर ही सही बॉलीवुड में एंट्री ले ली थी। ये फिल्म सिल्वर स्क्रीन पर किरदारों को यथार्थ के करीब लाने में कारगर रही। इसके बाद तो अनुराग ने एक से बढ़कर एक फिल्में लिखी और फिर 'पांच' का निर्देशन किया। अफसोस ये फिल्म आज तक रिलीज ही नहीं हो पाई है। अनुराग ने बतौर डायरेक्टर 'ब्लैक फ्राइडे' से अपना डेब्यू किया और तब से लेकर आज तक उन्होंने कई यादगार किरदार सिनेमा को दे दिए हैं।


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Gaurav Nauriyal