Who Was Rehman Dakait?: बॉलीवुड में गैंगस्टर पर कई फिल्में बनी हैं, जिन्हें दर्शकों का खूब प्यार भी मिला है, लेकिन कई बार कुछ किरदार ऐसे होते हैं, जिनकी क्रूरता की दास्तान सुनकर रूह कांप जाती हैं. ऐसा ही एक खौफनाक किरदार निभाकर अक्षय खन्ना इन दिनों बॉक्स ऑफिस से लेकर सोशल मीडिया तक छाए हुए हैं. हाल ही में रिलीज हुई आदित्य धर की फिल्म 'धुरंधर' (Dhurandhar) में लीड रोल में एक्टर रणवीर सिंह (Ranveer Singh) नजर आए हैं, लेकिन तारीफें सारी फिल्म में विलेन का किरदार निभाने वाले अक्षय खन्ना (Akshaye Khanna) को मिल रही हैं. इस मूवी में उन्होंने रहमान बलूच उर्फ रहमान डकैत (Rehman Dakait) का किरदार निभाया है. ऐसे में आइए जानते हैं एक्टर जिसका रोल निभाकर हर तरफ छाए हुए हैं वो है कौन?
क्या है Dhurandhar की कहानी?
आदित्य धर के डायरेक्शन में बनी रणवीर सिंह स्टारर फिल्म 'धुरंधर' (Dhurandhar Box Office) 5 दिसंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. बता दें कि, यह फिल्म असल जिंदगी की घटनाओं पर आधारित है, जिसमें पाकिस्तान में आतंक के खिलाफ भारत की लड़ाई और आतंकी हमलों का बदला लेने की कहानी को दिखाया गया है. जिसमें अक्षय खन्ना (Akshaye Khanna) ने गैंगस्टर रहमान (Rehman Dakait) का रोल किया है, जो अपने कजिन और सेकंड-इन-कमांड, उजैर बलूच के साथ ल्यारी पर राज करता है. पर्दे पर रहमान डकैत को जैसा दिखाया गया है, वो असल जिदंगी में उससे कहीं ज्यादा खूंखार था.
कौन था Rehman Dakait?
1975 में पैदा हुए पाकिस्तानी गैंगस्टर रहमान डकैत (Kaun Tha Rehman Dakait?) का पूरा नाम सरदार अब्दुल रहमान बलूच था, जिसने 2000 के दशक में ल्यारी में आतंक मचाया हुआ था. उसने बेहद ही कम उम्र में ल्यारी में ड्रग्स बेचना बेचना शुरू कर दिया था. कहते हैं कि, रहमान ने 13 साल की उम्र में किसी को चाकू मार दिया था. हालांकि, उसने 19 साल की उम्र में जो किया वह अच्छे-अच्छों का दिल दहला सकता है. दरअसल, रहमान ने महज 19 साल की उम्र में अपनी मां का गला घोंट दिया था और फिर उन्हें पंखे से लटकाकार मार डाला. फिल्म 'धुरंधर' के एक सीन में इसे दिखाया भी गया है.
अब्दुल रहमान बलूच कैसे बना Rehman Dakait?
90 के दशक के आखिर में रहमान कुख्यात हाजी लालू के गैंग में शामिल हो गया, लेकिन साल 2001 में लालू की गिरफ्तारी हो गई, जिसके बाद पूरे गैंग की कमान रहमान ने अपने हाथ में संभाल ली और 8 सालों तक उसने ल्यारी को अपना अभेद किला बना लिया, जिसमें उजैर और उसके साथी, बाबा लाडला उसके भरोसेमंद आदमी थे. इन तीनों की ही क्रूरता की हद पार थी. डेली गार्डियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अपनी ताकत का प्रदर्शन करने के लिए रहमान के इशारे पर लाडला और बलूच उसके दुश्मनों के कटे हुए सिर से फुटबॉल खेला करते थे.
कैसे हुआ रहमान डकैत का अंत?
वो कहते हैं न जब पाप का घड़ा भर जाता है, तो फूटने में देर नहीं लगती है. कुछ ऐसा ही रहमान डकैत के साथ भी हुआ. जब उसकी दरिंदगी की हर हद पार हो घई तो, अगस्त 2009 में ल्यारी गैंग पर सरकार की कार्रवाई के दौरान कराची पुलिस के साथ शूटआउट में रहमान डकैत मारा गया. जब उसका एनकाउंटर हुआ, तब उसकी उम्र महज 34 साल की थी, वहीं उसके मरने के बाद गैंग की कमान इसके कजिन उजैर ने संभाली.
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