Panchayat Season 4: कैमरे पर चमकता 'फुलेरा', हकीकत में जूझ रहा गांव, पंचायत की शूटिंग के बाद छलका ग्रामीणों का दर्द!
Panchayat Season 4: कैमरे पर चमकता 'फुलेरा', हकीकत में जूझ रहा गांव, पंचायत की शूटिंग के बाद छलका ग्रामीणों का दर्द!
Panchayat: ओटीटी की फेमस वेब सीरीज 'पंचायत' का चौथा सीजन रिलीज हो चुका है, और सोशल मीडिया पर इसकी धूम है. कहानी में दिखाया गया 'फुलेरा' गांव भले ही पर्दे पर सुंदर और व्यवस्थित नजर आता है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है. एक नजर इन तस्वीरों पर...
ओटीटी की फेमस वेब सीरीज 'पंचायत' का चौथा सीजन रिलीज हो चुका है, और सोशल मीडिया पर इसकी धूम है. कहानी में दिखाया गया 'फुलेरा' गांव भले ही पर्दे पर सुंदर और व्यवस्थित नजर आता है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है. दरअसल, जिस गांव में पंचायत की शूटिंग होती है, वह मध्य प्रदेश के सीहोर जिले का महोड़िया गांव है. जब वेब सीरीज में उसे यूपी के बलिया जिले का 'फुलेरा गांव' दिखाय गया है.
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पंचायत के 'फुलेरा' की सच्चाई
बारिश के बाद महोड़िया गांव की हालत बदतर हो चुकी है. जिस पंचायत भवन को हम सीरीज में चमचमाता देखते हैं, वो असल में कीचड़ से घिरा है. गांव के बीचोबीच बनी पानी की टंकी के पास झाड़ियां उग आई हैं.
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गांव की ऐसी है हालत
सोशल मीडिया पर लोग पंचायत में दिखाए गए 'बृज भूषण दुबे' और 'भूषण' के कार्यकाल की तुलना मीम्स के जरिए कर रहे हैं. एक में गांव साफ-सुथरा दिखता है, दूसरे में कीचड़ और बदहाली...
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रील लाइफ में विकास, रियल लाइफ में परेशानियां
मीडिया रिपोर्टिंग के मुताबित महोड़िया की हालात बेहद हैरान कर देने वाली है. गांव को इस बात की शिकायत है, कि 'पंचायत' ने गांव को नाम तो दिलाया, लेकिन असल में कोई विकास नहीं हुआ. शूटिंग से उन्हें कोई फायदा नहीं मिला. गांव की सफाई और बाकी व्यवस्थाएं असली पंचायत और प्रधान की जिम्मेदारी है, वेब सीरीज की टीम इसमें कोई योगदान नहीं दी.
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इतने महीने तक चली 'पंचायत-4' की शूटिंग
पंचायत के चौथे सीजन की शूटिंग गांव में करीब तीन महीने तक चली थी. जितेंद्र कुमार (सचिव जी), नीना गुप्ता (मंजू देवी), रघुबीर यादव (बृज भूषण), फैसल मलिक (प्रह्लाद चा) जैसे कलाकार इसी गांव की गलियों और घरों में नजर आए. गांव के ही कुछ लोग भी शूटिंग में शामिल हुए थे.
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गांव का नाम 'फुलेरा' क्यों?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्रामीणों को वेब सीरीज में गांव का असली नाम न दिखाना उन्हें खलता है. उनका मानना है, कि अब तक चारों सीजन यहीं शूट हुए हैं, और आगे भी पांचवे से सातवें सीजन तक की शूटिंग यहीं होनी है. वे अब मेकर्स से मांग करेंगे कि आगे के सीजन में गांव का असली नाम यानी 'महोड़िया' जरूर दिखाया जाए.
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बना टूरिस्ट स्पॉट, लेकिन हाल बेहाल
पंचायत की पॉपुलैरिटी से गांव को पहचान जरूर मिली है. दूर-दूर से लोग महोड़िया घूमने आते हैं, यहां तक कि फोटो खिंचवाने के लिए भीड़ लग जाती है, लेकिन गांव वालों के मुताबिक, कि पहचान के साथ अगर थोड़ा विकास भी हो जाता, तो बात बन जाती. अब ग्रामीण चाहते हैं, कि सरकार 'महोड़िया' को एक 'मॉडल विलेज' के रूप में विकसित करे.
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बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहा गांव
बहरहाल, 'पंचायत' भले ही एक एंटरटेनिंग सीरीज है, लेकिन इससे जुड़ा असली गांव अभी भी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहा है.
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