Pati Patni Aur Woh movie review
बॉलीवुड स्टार कार्तिक आर्यन (Kartik Aaryan) की फिल्म पति पत्नी और वो (Pati Patni Aur Woh) सिनेमाघर पहुंच चुकी है। इस फिल्म में कार्तिक आर्यन के साथ लीड रोल में भूमि पेडनेकर (Bhumi Pednekar) और अनन्या पांडे (Ananya Panday) हैं। संजीव कुमार स्टारर 70 के दशक की फिल्म पति पत्नी और वो के इस रीमेक को देखना कितना मजेदार हैं ये हम आपको अपने इस रिव्यू के जरिए बताते हैं ताकि फिल्म देखने की प्लानिंग से पहले आप ये जान लें कि ये फिल्म आपके लिए पैसा वसूल साबित होगी या नहीं। तो आइए देखते हैं कैसी है फिल्म –
तो जैसा कि आप जानते हैं कि फिल्म की कहानी 1978 में आई बीआर चोपड़ा की फिल्म पति पत्नी और वो का रीमेक हैं। ऐसे में कहानी से आप वाकिफ हैं ही। लेकिन ये फिल्म नए जमाने के कलेवर में अच्छे से लिपटी हुई है। फिल्म में ड्रामे की जगह कॉमेडी को खासा तव्जजो दी गई है। इस फिल्म में चिंटू त्यागी के रोल में कार्तिक आर्यन ने एक ऐसे सरकारी बाबू का किरदार निभाया है जो मजे की जिंदगी जी रहा और और उसके पास बेहतर नौकरी और छोकरी यानी पत्नी वेदिका (भूमि पेडनेकर) है। जो उससे बहुत प्यार करती है। लेकिन चिंटू जी की लाइफ में ट्विस्ट तब आता है जब कहानी में एंट्री होती है तपस्या यानी अनन्या पांडे की। जो शहरी है और बिंदास है। जिसे अपने काम और खुद को खुश रखने से बहुत प्यार है और वो कहीं से भी हो खुशियां बटोर ही लेती है।
तो फिल्म में कार्तिक आर्यन, भूमि पेडनेकर और अनन्या पांडे की धमाकेदार तिकड़ी के अलावा मुद्स्सर अजीज का शानदार निर्देशन हैं जो इसे खास बनाता है। फिल्म के डायलॉग्स बेहतरीन हैं जो खूबसूरती से निभाए भी गए हैं। लखनऊ का चार्म पूरी तरह से फिल्मी कैनवास पर दिखाया गया है। जो बेहद खास बन पड़ा है। फिल्म में चिंटू त्यागी के बेस्ट फ्रेंड फाहिम रिजवी के किरदार में अपारशक्ति खुराना की शानदार परफॉर्मेंस भी आपका दिल जीत लेने वाली है। अनन्या ने शानदार काम किया है जो बेहद क्यूट लड़की के रोल में बेहतरीन लगी है। वहीं, राजेश शर्मा भी अपने किरदार में जबरदस्त लगे हैं। वहीं, भूमि की बात करें तो उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वो अपने हिस्से का स्क्रीन स्पेस खिंचना अच्छे से जानती हैं। वो हीरो की नाक के नीचे से अपने लिए लाइमलाइट ले जाना अच्छे से जान गई हैं। फिर चाहें वो किसी भी तरह के रोल में हो अपना इंप्रेशन दर्शकों के दिमाग में छोड़ ही देती है। पत्नी के किरदार में भी उन्होंने वाहवाही लूट ली है।
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फिल्म ने हंसाने में कोई कमी नहीं छोड़ी है। फिल्म में शानदार कॉमिक मूमेंट हैं खासकर आखिरी के 30-40 मिनट में। लेकिन फिर भी ये आपको अंत में ठीक से नहीं जमती। इसकी वजह इसी कॉन्सेप्ट पर बनी फिल्में जैसे, साजन चले ससुराल, बीबी नंबर 1 और मस्ती के सीन्स की ये याद दिलाते हैं। ऐसे में फिल्म के अंत में फ्रेशनेस की कमी लगती है। वहीं, फिल्म का संगीत भी कहीं-कहीं कानों को चुभता है और खास यादगार नहीं है। ऐसी फिल्मों में संगीत की अहम भूमिका होती है जैसी बीती दफा ड्रीम गर्ल का संगीत दर्शकों के दिलों पर छाप छोड़ गया था कुछ वैसा ही। लेकिन फिर भी फिल्म ठीक है और एक बार देखी जा सकती है।
हमारी ओर से इस फिल्म को पूरे 3 स्टार। हल्की-फुल्की कमियों को छोड़ दें तो फिल्म देखी जा सकती है। ये आपको हंसाएगी और सिनेमाघर छोड़ते हुए खलेगी नहीं।
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