अनुपमा ने उठाया कदम
स्टार प्लस के सुपरहिट शो 'अनुपमा' में जिस प्रेम को अनुपमा कभी अपने बेटे की तरह प्यार करती थी और जिस पर उसे सबसे ज्यादा नाज था, वही प्रेम अब उसका सबसे बड़ा और कट्टर दुश्मन बन चुका है. अनुपमा को बिजनेस के मैदान में हराने के लिए प्रेम ने सारे पैंतरे आजमा लिए, लेकिन जब वह सीधे तरीके से नहीं जीत पाया, तो उसने बेहद घटिया रास्ता चुना. प्रेम ने अनुपमा की पीठ में छुरा घोंपते हुए उसका सबसे बड़ा बिजनेस कॉन्ट्रैक्ट ही चुरा लिया. जब अनुपमा को इस बात का पता चला, तो वह समझ गई कि प्रेम ने इंसानियत और मर्यादा की सारी हदें पार कर दी हैं.
इस चोरी के बाद घर में जबरदस्त हंगामा खड़ा हो जाता है. राही भी प्रेम की इस हरकत पर सवाल उठाती है, लेकिन प्रेम बहुत चालाकी से राही को उसकी पुरानी कसम याद दिलाता है. वह कहता है कि तुमने मुझसे वादा किया था कि चाहे मैं सही हूं या गलत, तुम हमेशा मेरा साथ दोगी. दूसरी तरफ, दिग्विजय का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है. वह गुस्से में लाल-पीला होकर प्रेम को मिस्टर लूजर का टैग दे देता है. जब राही एक बार फिर प्रेम का बचाव करने के लिए आगे आती है, तो अनुपमा का पारा चढ़ जाता है. अनुपमा बेहद कड़क आवाज में कहती है कि आज से प्रेम उसका कोई अपना नहीं, बल्कि उसका सबसे बड़ा विरोधी है.
प्रेम के इस हरकत के बाद अनुपमा का धैर्य पूरी तरह टूट जाता है. प्रेम खुलेआम अनुपमा को धमकी देता है कि वह उसके सपनों के महल यानी 'अनु की रसोई' कैफे को मिट्टी में मिला देगा. लेकिन अनुपमा इस गीदड़ भभकी से डरने वाली नहीं है. वह प्रेम की आंखों में आंखें डालकर कहती है, "अगर हिम्मत है, तो कुचल कर दिखाओ मेरे सपनों को. तुम मुझसे कागजात और कॉन्ट्रैक्ट तो छीन सकते हो, लेकिन मेरे हाथों का हुनर और मेरा टैलेंट कभी नहीं चुरा पाओगे.
इस पूरे ड्रामे को देखकर घर के बुजुर्ग बापूजी को महाभारत की याद आ जाती है. वह कहते हैं कि जैसे कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन अपने ही भाइयों और गुरुओं पर तीर चलाने से हिचकिचा रहे थे, तब भगवान कृष्ण ने उन्हें याद दिलाया था कि जो धर्म के खिलाफ खड़ा है, वो भाई या दोस्त नहीं बल्कि दुश्मन होता है. ऐसी ही एंटरटेनमेंट खबरों को जानने के लिए पढ़ते रहिए बॉलीवुडलाइफ हिंदी.