वीरानी परिवार में मचा कलह
क्यूंकी सास भी कभी बहू थी में इस समय रेओ नाम का तूफान है, जो वीरानी परिवार की खुशियों को खत्म कर रहा है. रेओ अपनी उस घिनौनी साजिश को याद कर मुस्कुरा रहा है, जहां उसने पार्थ के भेजे हुए बुके और प्यार भरे खत को फाड़कर फेंक दिया था. इस साजिश का अंजाम तब देखने को मिलता है, जब पार्थ और नंदिनी अपनी आंखों के सामने वैष्णवी को रेओ को केक खिलाते हुए देखते हैं.
यह देखते ही पार्थ का खून खौल उठता है. वह पूरी महफिल के सामने वैष्णवी पर चिल्लाता है कि वह घर पर उसका इंतजार कर रहा था और वह यहां रेओ के साथ अपना जन्मदिन मना रही है. हैरान-परेशान वैष्णवी पलटकर जवाब देती है कि उसे पार्थ की तरफ से कोई न्योता ही नहीं मिला था. जब रेओ इस बहस में कूदकर वैष्णवी का पक्ष लेने की कोशिश करता है, तो पार्थ उसे अपनी औकात में रहने और मियां-बीवी के मामले से दूर रहने की सख्त हिदायत देता है.
असली भूचाल तो तब आता है जब नंदिनी का गुस्सा तुलसी पर फूटता है. नंदिनी, तुलसी पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहती है कि जो रेओ सिर्फ दो दिन पहले इस घर में आया है, उसके लिए तुलसी का प्यार उमड़ रहा है, जबकि पार्थ की कोई कीमत नहीं है. वह तुलसी के अतीत का सबसे गहरा जख्म कुरेदते हुए कहती है कि 'अंश' को मारने का जो गुनाह तुलसी के सिर पर है, उसी का कर्ज चुकाने के लिए वह आज रेओ पर जरूरत से ज्यादा मेहरबान हो रही है.
मानसिक रूप से टूट चुकी तुलसी जब मिहिर को फोन लगाती है, तो उसका फोन स्विच ऑफ आता है. बेबसी में वह करण को फोन कर अगले दिन घर आने को कहती है. दूसरी तरफ, वैष्णवी भी तुलसी के पास आकर पार्थ के गुस्से और बदतमीजी का रोना रोती है. तुलसी एक आदर्श मां की तरह पार्थ का बचाव करते हुए कहती है कि हालात इतने उलझ गए हैं कि पार्थ समझ नहीं पा रहा कि वह क्या करे, और इसमें गलती पार्थ की नहीं बल्कि उसकी है.
आने वाले एपिसोड में हम देखेंगे कि करण घर आकर नंदिनी को समझाने की कोशिश करता है कि रेओ उम्र और बिजनेस के तजुर्बे में पार्थ से बहुत बड़ा है, तो अगर मां ने रेओ को 'पावर ऑफ अटॉर्नी' दे दी, तो इसमें गलत क्या है? इस पर तुलसी जैसे ही नंदिनी से कहती है कि उसने करण को आग बुझाने के लिए बुलाया था, भड़काने के लिए नहीं, तो नंदिनी जहरीला कहती है, 'अपना मुंह बंद कराने का यह आपका अच्छा तरीका है.' ऐसी ही एंटरटेनमेंट खबरों को जानने के लिए पढ़ते रहिए बॉलीवुडलाइफ हिंदी.